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कैबिनेट मंत्री डा हरक सिंह रावत को अभी तक उत्तराखंड का मुख्यमंत्री न बन पाने का मलाल; जाने राजनितिक सफ़र

कैबिनेट मंत्री डा हरक सिंह रावत को अभी तक उत्तराखंड का मुख्यमंत्री न बन पाने का मलाल है। हरक का कहना है कि उनकी किस्मत में मुख्यमंत्री बनना नहीं लिखा है। वर्ष 2012 में वह मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए थे। रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कैबिनेट मंत्री रावत ने वर्ष 2012 के किस्से को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद कांग्रेस सरकार बनाने जा रही थी। उन्हें आनन-फानन दिल्ली बुलाया गया और कहा गया कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। देर रात अचानक परिदृश्य बदल गया। उनके पास फोन आया कि कभी-कभी मुंह के सामने खाने की थाली रखने के बाद भी निवाला नहीं खाया जाता। वह समझ गए और अगले दिन विजय बहुगुणा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बन गए।एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में उन्होंने कांग्रेस इसलिए नहीं छोड़ी थी कि वह मंत्री बनें। उन्हें कहीं न कहीं यह उम्मीद थी कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।

ऐसा नहीं हो पाया। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ संबंधों पर हरक सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने त्रिवेंद्र को जेल जाने से बचाया था। कांग्रेस की सरकार के दौरान उनके पास कृषि मंत्रालय था। सरकार चाहती थी कि ढैंचा बीज घोटाले में त्रिवेंद्र सिंह रावत को जेल भेजा जाए। उनके मन में त्रिवेंद्र सिंह के लिए एक साफ्ट कार्नर था, इसलिए उन्होंने ऐसा नहीं होने दिया।राजनीतिक विरासत के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने बच्चों पर ही छोड़ रखा है। बच्चे जो चाहेंगे, वैसा ही किया जाएगा। आम आदमी पार्टी में जाने की बात को उन्होंने सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी आम आदमी पार्टी के नेताओं से मुलाकात की बात पूरी तरह गलत है।

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