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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत केदारनाथ पहुंचे;रावत भोले के दरबार में भक्ति में सराबोर होकर जमकर नाचे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच नवंबर को केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं। जैसे ही कार्यक्रम तय हुआ, कांग्रेस के दिग्गज पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले ही भगवान के दर पर जा पहुंचे। रावत भोले के दरबार में भक्ति में सराबोर होकर जमकर नाचे। अब ईमानदारी कहें या राजनीतिक चातुर्य, तुरंत इंटरनेट मीडिया में अपने दिल की बात सार्वजनिक भी कर दी। बोले, कुछ मित्र पूछ रहे हैं केदारधाम में भगवान से क्या मांगा, मैंने कहा कि हे ईश्वर मुझे फिर मुख्यमंत्री बनने के लिए आशीर्वाद दे दें। हरदा की इच्छा पर भगवान कितनी कृपा बरसाते हैं, यह तो चुनाव बाद ही सामने आएगा, लेकिन इतना जरूर है कि कांग्रेस न सही, भाजपा उन्हें चने के झाड़ पर चढ़ाने को तैयार है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जिस अंदाज में देहरादून की जनसभा में रावत को टार्गेट किया, उससे तो ऐसा ही लगता है।

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत अकसर सुर्खियां बटोरते रहते हैं। जलवा इतना कि अपनी सरकार को कठघरे में खड़ा करने से भी नहीं हिचकते। पहले भी कई दफा नौकरशाही के निरंकुश रवैये को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। भाजपा, बसपा, कांग्रेस के बाद पिछले पांच साल से फिर भाजपा में हैं। हमेशा ही बेलाग बयानों को लेकर विवादों का हिस्सा रहे। ताजा मामला कैबिनेट बैठक में एक नौकरशाह को आड़े हाथ लेने का है। कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद स्वास्थ्य महकमे के अफसर पर इस कदर भड़के कि आसपास खड़े तमाम मंत्री भौचक रह गए। हुआ यह कि हरक के विधानसभा क्षेत्र कोटद्वार में मेडिकल कालेज की स्थापना का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाना था, मगर अफसर ऐसे कि मंत्री को दरकिनार कर डाला। फिर क्या था, इतनी खरीखोटी शायद ही अफसर को कभी सुननी पड़ी होगी। तुरंत बोले, अगली बैठक में जरूर आ जाएगा प्रस्ताव।

हाल ही में भाजपा के चुनावी रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उत्तराखंड आए, जनसभा को संबोधित किया। अब माहौल चुनावी है तो शाह ने मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस को तो टार्गेट किया ही, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी कतई नहीं बख्शा। रावत कांग्रेस के बड़े नेता, विधानसभा चुनाव अभियान समिति के मुखिया भी हैं। शाह का निशाना साधना वाजिब है, मगर रावत खेमा इससे खफा कम और खुश ज्यादा है। दरअसल, रावत लगातार अपनी पार्टी से गुहार लगाते आ रहे हैं कि कांग्रेस मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर विधानसभा चुनाव में जाए। अब यह तो आप समझ ही गए होंगे कि चेहरा उनके अलावा किसी का नहीं हो सकता। सोनिया, राहुल, प्रियंका ने रावत की गुहार को तवज्जो नहीं दी, लेकिन शाह ने कई बार नाम लेकर मानों उनके मन की मुराद ही पूरी कर दी। सुना है कांग्रेस में रावत के विरोधी अब सिर पीट रहे हैं।

कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, राज्य के एक विधायक हैं। किसी दल विशेष के मोहताज नहीं। निर्दलीय विधायक बने, फिर कांग्रेस और भाजपा के झंडे तले भी चुनाव जीता। खुद का मजबूत जनाधार है, लेकिन दिक्कत यह कि इन्हें विवादों से बहुत प्यार है। कभी तमंचे लहराते हैं, तो साथी विधायक को लपेटने से भी गुरेज नहीं। दिल के साफ बताए जाते हैं, मगर जबान पर कभी बाबू नहीं रख पाए। कुछ समय पहले भाजपा ने इसीलिए बाहर का रास्ता दिखाया, फिर गले लगा लिया। दो दिन पहले मंत्रिमंडल में खाली एक सीट पर दावा ठोका, लेकिन अगले ही दिन अर्श से फर्श पर पहुंच गए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में मंच पर जा विराजे, शायद जानकारी नहीं थी कि इनका नाम मंच पर जगह पाने वालों में शुमार नहीं। मंच से उतारा गया तो तो खफा होकर कार्यक्रम से ही निकल गए। नहीं मालूम, अब क्या करेंगे।

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