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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य को राजनीतिक अस्थिरता से बचाने को 21 सदस्यीय विधान परिषद के गठन की पैरवी की

पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति अध्यक्ष हरीश रावत ने राज्य को राजनीतिक अस्थिरता से बचाने को 21 सदस्यीय विधान परिषद के गठन की पैरवी की है। इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के पहले दिन से राजनीतिक अस्थिरता हावी है। राजनीतिक स्थिरता नहीं होने की सूरत में विकास नहीं होता, सिर्फ बातें होती हैं। 21 साल का इतिहास यही बताता है। ऐसे में हमेशा से ही उनके मन में राजनीतिक दलों में आंतरिक संतुलन और स्थिरता का सवाल उठता रहा है।राज्य के भीतर प्रत्येक राजनीतिक दल में इतने लोग हैं कि सभी को समन्वित कर चलना कठिन है। यह कठिनतर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में मंत्रिमंडल की संख्या निर्धारित करने के केंद्र सरकार के निर्णय के चलते छोटे राज्यों के सामने दिक्कतें हैं। उत्तराखंड जैसे राज्य 12 मंत्री बनाए जा सकते हैं। छोटे राज्य में वे तमाम विभाग हैं जो बड़े राज्यों में भी हैं। विभागों के सचिव भी हैं, लेकिन एक-एक मंत्री को कई विभाग संभालने पड़ रहे हैं। इन विभागों में किसी में उनकी रुचि ज्यादा तो किसी में कम होती है। इससे छोटे विभागों पर बुरा असर पड़ रहा है।

उत्तराखंड में भी ऐसा रास्ता निकालना पड़ेगा, ताकि सत्तारूढ़ दल हो या विपक्षी दल, उनमें राजनीतिक स्थिरता रहे। साथ ही एक परिपक्व राजनीतिक धारा राज्य के अंदर विकसित हो सके। एक निश्चित सोच के आधार पर राजनीतिक दल प्रशासनिक व्यवस्था और विकास का संचालन करें। उन्होंने कहा कि 2002 के कांग्रेस के घोषणापत्र में उन्होंने विधान परिषद के गठन का वायदा किया था। कतिपय कारणों से इसका गठन नहीं हो पाया। इससे राज्य में नेतृत्व विकास भी होगा।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य और जिला स्तर पर की जा रही विभिन्न विभागों से जुड़ी घोषणाओं के क्रियान्वयन को लेकर शासन सक्रिय हो गया है। इस कड़ी में अपर मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री की सिंचाई विभाग से संबंधित घोषणाओं की समीक्षा की। अपर मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि इस माह के आखिर तक सभी विभागीय घोषणाओं के शासनादेश अनिवार्य रूप से करा लिए जाएं। बैठक में अपर सचिव सिंचाई उमेश नारायण पांडेय, प्रमुख अभियंता सिंचाई मुकेश मोहन, जेएल शर्मा सहित मुख्यमंत्री घोषणा प्रकोष्ठ के अधिकारी उपस्थित थे।

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