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देवभूमि के दर्शन कराने मैदान में उतरा पहाड़, लोक कलाओं ने मोह लिया मन

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 मशकबीन और रणसिंघा की गगनभेदी तान संग रंग-बिरंगी पारंपरिक परिधान पहने कलाकर सड़क पर निकले तो मैदान में पहाड़ों की छटा उतर आई। मौका था उत्तरायणी जनकल्याण समिति की ओर से आयोजित उत्तरायणी मेले के रंगारंग आगाज का। रंगयात्रा में शामिल छोलिया टीम के मनमोहक लोकनृत्य को देखने के लिए हर कोई आतुर नजर आया।मेयर उमेश गौतम ने रंगयात्रा का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इसमें कलाकारों ने देवभूमि की अद्भुत संस्कृति का प्रदर्शन करते हुए शहरवासियों को रोमांचित किया। शोका समाज के पिछौड़ा परिधान में सजी बालिकाओं ने कुमाऊंनी संस्कृति की छटा बिखेरी। इस दौरान विभिन्न स्कूली बच्चों ने भी कलाकारों के साथ कदमताल कर समा बांधा।

कोतवाली स्थित पार्क से शुरू होकर पटेल चौक, चौकी चौराहा, सर्किट हाउस चौराहा होते हुए रंगयात्रा बरेली क्लब पहुंची। बरेली क्लब के मैदान में उत्तरायणी मेले का डीआईजी राजेश कुमार पांडेय ने शुभारंभ किया। उन्होंने टिबरीनाथ सांग्वेद संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों के साथ दीप जलाकर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। इसके बाद मंच पर उत्तराखंड के लोक कलाओं के प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हुआ तो वह देर रात तक चलता रहा। गढ़वाल और कुमाऊं के लोकनृत्य, लोकगीतों ने धूम मचा दी। झोड़ा, चांचरी, छपेली गीतों ने मन मोह लिया। संयुक्त आयकर आयुक्त एसबी सिंह ने स्मारिका का विमोचन किया। शुभारंभ के बाद मंच पर मेले में पीसी पाठक, भुवन पांडेय, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, रमेश चंद्र शर्मा, देवेंद्र जोशी, भूपाल सिंह बिष्ट, संतोष पांडेय अनूप, मनोज पांडे, दिनेश पंत समेत अन्य पदाधिकारी, सलाहकार, सदस्य आदि मौजूद रहे।

शुभारंभ के बाद मंच पर उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक दिखाने के लिए टीमें उतरीं तो जो जहां था वहीं, थिरकता नजर आया। इसमें कमलेश बिष्ट, जगदीश आर्या, चंद्र प्रकाश जोशी, रमा लोहानी, कमला पांडेय, वंदना, सोमा परिहार, चंद्रा बिष्ट के निर्देशन में तैयार टीमों ने बढ़चढ़कर प्रतिभागिता की। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी पूरन सिंह दानू ने ‘बरेली में झुमका गिरा’ सुनाकर शहरवासियों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कुमाऊं के ‘भीष्म पितामह’ ने जीत लिया मन

सांस्कृतिक कार्यक्र म का शुभारंभ एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने किया। एक ओर शाम ढलती जा रही थी तो दूसरी ओर, मंच पर लोककलाओं की छटा बिखर रही थी। पहले दिन मंच को उत्तराखंड के भीष्म पितामह के तौर पर पहचाने जाने वाले 76 साल के लोक गायक नैन नाथ रावल ने संभाला। इसके बाद उभरते हुए लोक कलाकार एकल गायक मनोज आर्या ने अपने सुरों से मैदान को थिरकाया। आखिरी में राजेंद्र मेहता के नेतृत्व में जय पूर्णागिरी देवभूमि उत्थान समिति खटीमा ने मंच पर शानदार प्रदर्शन किया। धीरे-धीरे स्टाल पर खरीदारी को पहुंचे लोग भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सिमटते रहे। इसके बाद सदाबहार गायक पूरन सिंह दानू, जगदीश आर्या, आनंद रोधियाल ने क्रमवार अपने गीतों से समां बांध दिया।

मेले में 150 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इन पर हस्तशिल्प के पहाड़ी खाद्य और अन्य उत्पाद खरीदने वालों की भीड़ लगी रही। इनमें कुमाऊं आचार, सिंगौड़ी, बाल मिठाई, गढ़वाल की दाल, मसालों के स्टॉलों संग उत्तराखंड कुटीर उद्योग और स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल शामिल रहे। जयपुर के चूरन, कोलकाता का काथा वर्क, देहरादून की खादी, चमकौर की सूखी डांग, रुद्रपुर के मसाले खरीदने के लिए भी स्टॉलों पर भीड़ उमड़ी।

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