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अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने कहा कि यदि उनके संज्ञान में लाए अथवा चर्चा के बिना जवाब भेजा गया तो वह विधिक कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की ओर से किए गए उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के आडिट में आई आपत्तियों का बोर्ड द्वारा जवाब देने के मामले में नया मोड़ आया है। बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने इस पर सवाल उठाए हैं। साथ ही कहा कि यदि उनके संज्ञान में लाए अथवा चर्चा के बिना जवाब भेजा गया तो वह विधिक कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे। इस संबंध में उन्होंने सचिव श्रम को पत्र भी भेजा है।कैग ने पूर्व में कर्मकार कल्याण बोर्ड में वर्ष 2017 से अक्टूबर 2020 तक हुए कार्यों का आडिट किया था। बाद में कैग ने आडिट आपत्तियों का छह सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए बोर्ड को पत्र भेजा, लेकिन जवाब नहीं मिला। बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव के मध्य विवाद के चलते इस दिशा में कार्रवाई नहीं हो पाई। तब बोर्ड ने सचिव मधु नेगी चौहान को हटाने की संस्तुति कर दी थी। हालांकि, शासन ने इस पर कोई फैसला नहीं किया है।

हाल में शासन ने भी कैग को आडिट आपत्तियों का जवाब न दिए जाने पर सख्त नाराजगी जताई और फिर बोर्ड को इस बारे में रिमाइंडर भेजा गया। वर्तमान में बोर्ड की सचिव मधु नेगी चौहान द्वारा आडिट आपत्तियों का जवाब तैयार कराया जा रहा है।अब इस मामले में बोर्ड के अध्यक्ष सत्याल की ओर से सचिव श्रम को पत्र भेजे जाने से नया मोड़ आया है। सत्याल ने पत्र में कहा है कि बोर्ड ने 16 जून को बोर्ड की सचिव मधु नेगी चौहान को पद से कार्यमुक्त करते हुए उनके प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार समाप्त कर दिए थे। इस संबंध में शासन को भी सूचित किया गया।इसके अलावा पूर्व में भी चौहान के विरुद्ध शासन से शिकायतें की गई थीं, मगर इनका कोई संज्ञान नहीं लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि इन परिस्थितियों में बिना उनके संज्ञान में लाए अथवा चर्चा के बगैर आडिट आपत्तियों का निराकरण चौहान द्वारा किस स्थिति में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आडिट आपत्तियां गंभीर प्रकृति की हैं और इनका जवाब गोलमोल कर शासन को भेजा जा रहा है।

पत्र में सत्याल ने यह भी कहा है कि 15 जून को तीन कार्मिकों की सेवाएं बहाल कर दी गई थीं, लेकिन चौहान द्वारा इनसे कोई कार्य नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में किस स्तर से आडिट आपत्तियों का जवाब तैयार कराया जा रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि बोर्ड में पूर्व में कार्यरत रहे उन कर्मियों के जरिये यह कार्य कराया जा रहा है, जिनकी इन वित्तीय अनियमितताओं में संदिग्ध भूमिका रही है। इससे स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाएगा। उन्होंने मांग की है कि बोर्ड में कार्यरत सभी कर्मचारियों के माध्यम से आडिट आपत्तियों का जवाब तैयार शासन को भिजवाने के लिए चौहान को निर्देशित किया जाए।

बोर्ड द्वारा कैग को आडिट आपत्तियों का जवाब अब सोमवार तक भेजा जाएगा। बोर्ड की सचिव मधु नेगी चौहान के अनुसार आडिट आपत्तियों के संबंध में कुछ बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जानी है। इसे देखते हुए अब सोमवार तक जवाब भेजा जाएगा।किसी भी संस्थान अथवा विभाग का आडिट करने के बाद इसमें आई आपत्तियों का जवाब देने के लिए कैग उसे एक मौका देता है। आडिट आपत्तियों का जवाब देना आवश्यक है। ऐसा न करने पर समझा जाता है कि कैग ने जो अनियमितता पकड़ी है या सवाल उठाए हैं वह सही हैं। इसका आडिट पैरा बनता है। फिर यह आडिट पैरा लोक लेखा समिति के पास जाता है, जिसकी वह सुनवाई करती है।

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