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पीपी मोड पर चल रहा है ठुलीगाड़ से पूर्णागिरि देवी रोपवे परियोजनाओं का निर्माण

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राज्य में अनेक स्थानों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रोपवे का निर्माण किया जा रहा है। इसी के तहत ठुलीगाड़ से पूर्णागिरि देवी रोपवे परियोजनाओं का निर्माण पीपी मोड पर चल रहा है। उक्त बात बाराही मंदिर देवीधुरा परिसर में केंद्र पोषित स्वदेश योजना हेरिटेज सर्किट के तहत 1581.00 लाख रूपये की लागत से पर्यटन सुविधाओं के विकास कार्यों का लोकार्पण करते प्रदेश के पर्यटन, सिंचाई एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने अपने संबोधन में कही।

महाराज ने कहा कि राज्य में अनेक स्थानों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रोपवे का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें कद्दूखाल से सुरकंडा देवी एवं ठुलीगाड़ से पूर्णागिरि देवी रोपवे परियोजनाओं का निर्माण पीपी मोड पर किया जा रहा है। उन्होने कहा कि विश्व के सबसे लंबे 5 रोपवे में से एक देहरादून से मसूरी तक 300 करोड़ की रोपवे योजना पर भी कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इसके अलावा नैनीताल और दीवा का डांडा आदि कई स्थलों पर भी रोपवे प्रस्तावित हैं।

महाराज ने कहा कि पर्यटन विभाग राज्य के सभी जनपदों में पर्यटन एवं तीर्थाटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय पौराणिक महत्व के स्थलों को चिन्हित कर उन्हें सर्किट में शामिल करने की योजना पर कार्य कर रहा है। यहाँ के पौराणिक क्रांतेश्वर महादेव को शिव सर्किट, नागनाथ मंदिर एवं गोरलचौड़ मैदान स्थित गोलज्यू मंदिर को नागराजा एवं गोलज्यू मंदिर और रमक के सूर्य मंदिर को नवग्रह सर्किट में शामिल किया गया है। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने लोकार्पण कार्यक्रम में उपस्थित क्षेत्रीय जनता को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत हेरिटेज सर्किट में शामिल अल्मोड़ा स्थित कटारमल में इंटरपिटेशन सेंटर, लैंडस्कैपिंग व साईट एमिनिटीज, जागेश्वर में पार्किंग, दानेश्वर इको लॉग हट्स, बागेश्वर स्थित बैजनाथ में इनको लॉग हट्स, पार्किंग, घाट डेवलपमेंट एवं यहाँ स्थित देवीधुरा में बाराही योद्धा बिल्डिंग, रूरल स्पोर्ट सेंटर और साईड डेवलपमेंट के तहत कुल 68 करोड़ 90 लाख 64 हजार के विकास कार्य किए गए हैं। उन्होने बताया कि राज्य के विभिन्न जनपदों में जल के संवर्धन और संरक्षण हेतु सिंचाई विभाग जलाशयों का निर्माण कर रहा है। रानीखेत, पिथौरागढ़, लोहाघाट, देहरादून एवं पौड़ी के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने और रोजगार की दृष्टि से मत्स्य पालन की संभावनाओं को देखते जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है।

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