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उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की वापसी की उम्मीदों का भार राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने अपने कंधों पर लिया

उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की वापसी की उम्मीदों को पूरा करने का बड़ा दारोमदार एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने अपने कंधों पर ले लिया है। राज्य और राष्ट्रीय राजनीति का यह मंझा खिलाड़ी बीते दिनों बतौर पंजाब प्रदेश प्रभारी कांग्रेस की उलझन को सुलझाने में अहम किरदार निभा चुका है। राज्य की राजनीति में मजबूत पैठ और अनुुभव को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर उत्तराखंड में चुनाव अभियान की कमान रावत को सौंप दी है। दैनिक जागरण ने चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत से कांग्रेस की रणनीति को लेकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश में तीन मुख्यमंत्री बदलकर जनता के बीच अपनी साख गवां चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीयता के माडल के मुकाबले कांग्रेस उत्तराखंडीयत के मुद्दे के साथ चुनाव मैदान में उतरने जा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि भारी बहुमत पाने के बावजूद भाजपा उत्तराखंड की जनता से जुड़ नहीं पाई। सरकार के फैसले से आम आदमी उपेक्षित महसूस कर रहा है। तीन मुख्यमंत्रियों का बदलना राज्यवासियों को बहुत अखरा है। इस वजह से 2017 में भाजपा की ओर उमड़ा मतदाताओं का बड़ा वर्ग अब कांग्रेस के साथ जुडऩे की उम्मीद है। मतदाताओं का यह वर्ग बसपा, उक्रांद, समाजवादी पार्टी और निर्दलीयों को छोड़कर भाजपा से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि 2017 में विधानसभा सीटों के लिहाज से भाजपा और कांग्रेस के बीच बड़ा फासला भले ही दिखाई दे, लेकिन कांग्रेस 2012 में उसे मिलने वाले मतों को 2017 में भी बरकरार रखने में कामयाब रही थी। भाजपा को कांग्रेस के कोर वोटर को तोडऩे में कामयाबी नहीं मिल पाई थी। नई परिस्थितियों में यह कोर वोटर कांग्रेस को आगे धकेलने में अहम भूमिका निभाएगा।

पिछले चुनाव में मोदी लहर और डबल इंजन से झटका खाई कांग्रेस के मुख्य रणनीतिकार रावत मानते हैं कि उत्तराखंड में डबल इंजन और मोदी माडल क्रेक हो चुका है। मोदी के हिंदुत्व की वजह से जुड़े वोटर को संभाले रखना भाजपा के लिए मुश्किल हो गया है। यह माडल अब काम नहीं करेगा। अपेक्षाएं अधूरी रहने से मध्य वर्ग नाराज है। अगले विधानसभा चुनावों में जीत मिलने से कांग्रेस का विश्वास वापस लौटेगा।चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा प्रोजेक्ट किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए ऐसा करना फायदेमंद रहेगा। केरल व असम में मिली हार के कारणों पर मंथन को गठित अशोक चव्हाण कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह जिक्र किया है। उत्तराखंड में संयुक्त लीडरशिप में चुनाव लड़े जा रहे हैं। उन्होंने भी प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के चेहरे में खुद को समाहित कर लिया है। पार्टी की अंदरूनी प्रक्रिया का वह भी हिस्सा हैं। सामूहिक नेतृत्व पर जोर देने वालों को भी यही करना चाहिए।

भाजपा की ओर से नए मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी को आगे किए जाने के सवाल पर उन्होंने कि भाजपा ने धामी की क्षमता को देखकर यह ट्रायल नहीं किया है। कांग्रेस को घेरने को यह कदम उठाया है। जवाब में कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर गणेश गोदियाल को आगे कर दिया है। कांग्रेस ने गोल पोस्ट शिफ्ट कर दिया तो अब अब भाजपा में इसे लेकर भी खलबली है। पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि युवा मुख्यमंत्री के रूप में धामी को आगे करने से भाजपा में असंतोष है। असंतुष्टों के लिए कांग्रेस के दरवाजे खुले हैं, लेकिन एंट्री देख-परख कर होगी। जीतने की उनकी कुव्वत भी देखी जाएगी।

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