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उत्तराखंड में हर पांच साल में सत्ताधारी दल बदलने का मिथक भाजपा ने विधानसभा चुनाव में में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर तोड़ दिया

उत्तराखंड में हर पांच साल में सत्ताधारी दल बदलने का मिथक भाजपा ने इस बार विधानसभा चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर तोड़ दिया, लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर पिछले 10 दिनों से ऊहापोह बना हुआ है। इस अवधि में एक नहीं 10 नाम चर्चा में रहे, जिनमें चुनाव हार जाने के बावजूद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कार्यवाहक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मजबूती से डटे रहे।अब चर्चा में रहे नामों में किसके सिर ताज सजेगा या फिर भाजपा नेतृत्व किसी अन्य के सिर पर हाथ रखता है, इसे लेकर सोमवार को केंद्रीय पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में होने वाली भाजपा विधायक दल की बैठक में तस्वीर साफ हो जाएगी। इस पर सभी की नजर टिकी हुई है।

पिछली भाजपा सरकार में जुलाई में हुए दूसरे नेतृत्व परिवर्तन के बाद पुष्कर सिंह धामी को कमान सौंपी गई थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने धामी को चेहरा घोषित किया था। चुनाव में पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया, लेकिन धामी खटीमा से चुनाव हार गए। यद्यपि, वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में मजबूती से डटे हैं।पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री डा रमेश पोखरियाल निशंक का नाम भी चर्चा में रहा। यह माना गया कि हरिद्वार से सांसद डा निशंक के व्यक्तित्व एवं उनके लंबे अनुभव को देखते हुए पार्टी उन्हें फिर से अवसर दे सकती है।

केंद्रीय राज्यमंत्री एवं नैनीताल से सांसद अजय भट्ट को भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया गया। वर्ष 2017 में उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया, लेकिन भट्ट स्वयं चुनाव हार गए। उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी का नाम भी चर्चा में है। केंद्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले बलूनी राज्य के विकास और यहां के सरोकारों को लेकर लगातार जुटे हैं। उनके प्रयासों से राज्य को कई उपलब्धियां हासिल हुई हैं।पिछली भाजपा सरकार में दो बार हुए नेतृत्व परिवर्तन के दौरान भी निवर्तमान मंत्री डा धन सिंह रावत मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल थे। इस बार भी वह इस दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं।

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