उत्तराखंड

बर्ड फ्लू के चलते पक्षियों की प्रजातियों में आ रही है गिरावट; अब तक सबसे ज्यादा मौतें कावों कि

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चमोली जिले के दूरस्थ क्षेत्र निजमुला घाटी में आधा दर्जन से ज्यादा कौवों के मरने से दहशत फैल गई है। बुधवार को यहां के इरानी गांव में खेतों में कौवों मरे पड़े मिले। बदरीनाथ वन प्रभाग के अधिकारियों को ग्रामीणों ने कौवों के मरने की सूचना दे दी है।घाटी के गोणा गांव में मंगलवार को भी एक पक्षी खेतों में मर गया था। वन विभाग की डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया की क्षेत्र में वन क्षेत्राधिकारी के साथ टीम भेजी गई है। पशु चिकित्सकों को भी इसकी सूचना दे दी गई है। मृत पक्षियों को कब्जे में लेकर सैंपल लिए जाएंगे।बर्ड फ्लू की आशंका के बीच राजधानी दून समेत विभिन्न इलाकों में मंगलवार को 64 कौवे, चार कबूतर और नौ बगुले मरे मिले हैं। मृत कौवों, बगुलों और कबूतरों को दफना दिया गया है। कुछ के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. एसबी पांडे के अनुसार फिलहाल किसी मृत पक्षी में बर्ड फ्लू के लक्षण नहीं हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद कुछ कहा जा सकता है। मंगलवार को राजधानी के विभिन्न इलाकों में 64 कौवे मरे पाए। दूसरी ओर नौ बगुलों और कबूतरों के भी मरने की सूचना मिली है। इतनी अधिक संख्या में कबूतरों, कौवों, बगुलों के मृत पाए जाने के बाद स्थानीय लोग बर्ड फ्लू की आशंकाएं जता रहे हैं।मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसबी पांडे का कहना है कि जहां से भी पक्षियों के मरने की सूचनाएं आ रही हैं वहां विभागीय टीम भेजकर जांच कराई जा रही है। कौवों की मौत बर्ड फ्लू बीमारी से हुई इसे लेकर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह पता चल सकेगी।

 

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