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हिमपात से सेला से आगे विशाल ग्लेशियर बनने से अधिक पर्यटकों के आने की संभावना ; ग्लेशियर ही बनेंगे पर्यटकों की राह में बाधा

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इस वर्ष भारी हिमपात से सेला से आगे विशाल ग्लेशियर बनने से अधिक पर्यटकों के आने की संभावना जताई जा रही है परंतु जिन ग्लेशियरों को देखने के लिए पर्यटक आने के इच्छुक रहते हैं उन्हीं ग्लेशियरों ने राह रोक दी है। दारमा मार्ग के प्रवेश द्वार सेला से आगे पूरा मार्ग ग्लेशियरों से पट चुका है। सेला से लेकर नागलिंग तक विशाल ग्लेशियर आ चुके हैं। नागलिंग से आगे दुग्तू तक हालात इससे भी अधिक खराब होने के आसार हैं। ऐसे में पंचाचूली ग्लेशियर तक पहुंच पाना संभव नहीं है।  पंचाचूली ग्लेशियर जाने के लिए दुग्तू तक वाहन जाता है। दुग्तू से मात्र साढ़े तीन किमी दूर ग्लेशियर है।

विगत कुछ वर्षों से पर्यटकों की पहली पसंद बने पंचाचूली ग्लेशियर तक पहुंचने में इस बार ग्लेशियर ही बाधक बने हैं। दरअसल, पंचाचूली ग्लेशियर पहुंचने वाले मार्ग के प्रवेश द्वार में ही ग्लेशियर आ जाने से मार्ग के शीघ्र खुलने के आसार नहीं हैं। उच्च हिमालयी दारमा घाटी पंचाचूली ग्लेशियर के निकट तक सड़क का निर्माण हो चुका है। बेहद खूबसूरत और रोमांचकारी माने जाने वाले इस ट्रेक पर मार्ग बनने से पूर्व भी भारी संख्या में ट्रेकर पहुंचते थे। इस मार्ग पर ट्रेकिंग बढऩे से दारमा घाटी के दुग्तू , दांतू में स्थानीय लोग होम स्टे भी खोल चुके हैं। पंचाचूली ग्लेशियर ट्रेक खुलने पर ही होम स्टे संचालकों की आजीविका चलती है।

दारमा मार्ग में सेला से नागलिंग तक ग्लेशियर आने से शीघ्र मार्ग खुलने के आसार नहीं होने से होम स्टे संचालक और ट्रेकिंग गाइड परेशान हैं। धारचूला से दुग्तू तक की दूरी लगभग 80 किमी है। धारचला से लगभग 50 किमी दूर सेला तक मार्ग ठीक है। इससे आगे बंद है। दुग्तू और दांतू में होम स्टे संचालक  जयंती दताल, महेश दताल, गणेश बंग्न्याल , मान सिंह  सौनाल  और गाइड संजय दताल और गणेश कहते हैं कि मार्ग संचालक सीपीडब्ल्युडी  है । विभाग मार्ग खोलने का प्रयास नहीं कर रहा है। अप्रैल माह से ट्रेकर आने प्रारंभ हो जाते हैं। उससे पूर्व होम स्टे संचालकों को खाद्यान्न से लेकर अन्य सामान धारचूला से पहुंचाना होता है।

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