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लद्दाख के बाद अब उत्तराखंड पर भी चीन की टेडी नजर ,भारत के इस काम पर आपत्ति जताई

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भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी तनाव के बीच पिछले एक महीने से दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। इस बीच चीन अब दोनों देशों की लगती दूसरी सीमा तक तनाव फैलाने लगा है। इसी क्रम में ड्रैगन उत्तराखंड से लगी सीमा पर नजरे दिखाने लगा है। यहां के लिपुलेख के पास बनाए गए एक अस्थायी संरचना को लेकर अब ड्रैगन ने आपत्ति जताई है।

एक अधिकारी ने बताया कि एक तरफ चीन सीमा से 800 मीटर दूर बनाए अस्थायी संरचना पर सवाल उठा रहा है, जबकि चीन ने सीमा से करीब 200 मीटर की दूरी पर अपने इलैक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स लगाए हैं। भारत ने सीमा क्षेत्र में जब से बुनियादी ढांचे के विकास का काम शुरू किया है, तब से ही चीन किसी न किसी बहाने दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उसकी तरफ से उन क्षेत्रों में भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जो कभी विवादित रहे ही नहीं।

भारतीय सीमा में बनाए गया यह अस्थायी संरचना सीमा से करीब 800 मीटर अंदर है। सूत्रों के मुताबिक, जब भारत ने कुछ दिनों पहले लिपुलेख तक जाने वाली एक सड़क का उद्घाटन किया, उसके बाद से ही चीन अस्थायी संरचना को लेकर सवाल उठाने लगा। इसके बाद से ही दोनों तरफ सैनिकों की पेट्रोलिंग भी बढ़ गई है।

बता दें कि उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को पार कर चीन की सीमा में प्रवेश करते हैं और कैलास मानसरोवर यात्रा इसी रास्ते से जाती है। इसे देखते हुए भारतीय सेना उत्तराखंड की सीमा के पास भी अपनी मुस्तैदी बढ़ा दी है। इसके साथ ही सड़क और पुल निर्माण के काम में तेजी लाई गई है।

यहां करीब 8000 फीट की ऊंचाई पर भारत-चीन सरहद के आखिरी गांव में ही 1962 की लड़ाई हुई थी। यहां नेलांग घाटी में भारत-चीन सीमा पर स्थित आखिरी गांव में युद्ध के निशान बाकी हैं। इस बार भी खबर है कि चीन ने अपनी दो हवाई पट्टियों पर लड़ाकू विमान तैनात कर दिए हैं लेकिन भारत ने भी चीन से निपटने की तैयार कर ली है।

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