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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तेवरों के बाद उन इंस्पेक्टर व दारोगाओं की खौफ में

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तेवरों के बाद उन इंस्पेक्टर व दारोगाओं की धड़कने बढ़ गई हैं, जिनका तबादला पहाड़ी क्षेत्रों के लिए हो गया था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कोरोना संक्रमण का हवाला देकर इन तबादलों पर रोक लगा दी थी।पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने 30 नवंबर को पदभार संभालने के बाद स्थानांतरण नीति तैयार करने के निर्देश जारी किए गए थे। नियमावली के अनुसार इंस्पेक्टर व दारोगाओं के लिए मैदानी जिलों में आठ साल व पहाड़ी जिलों में चार साल, वहीं हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल के लिए क्रमश: 12 व 16 साल और पहाड़ी जिलों में छह व आठ साल नौकरी करना अनिवार्य किया था।

डीआइजी गढ़वाल रेंज नीरू गर्ग ने संतुलन बनाते हुए 22 मार्च को 19 इंस्पेक्टरों के तबादले मैदान से पहाड़ व पहाड़ से मैदानी जिलों में कर दिए। इसके बाद 16 अप्रैल को 108 दारोगाओं को मैदानी जिलों से पहाड़ व पहाड़ी जिलों से मैदान में ट्रांसफर कर दिया। ट्रांसफर लिस्ट में सबसे पहले उन्हें शामिल किया गया, जोकि अब तक पहाड़ चढ़े ही नहीं या फिर एक या दो साल ही पहाड़ में नौकरी की।तबादला सूची जारी होने के बाद लंबे समय से पहाड़ी जिलों व दुर्गम क्षेत्रों में ड्यूटी कर रहे इंस्पेक्टर व दारोगाओं में खुशी की लहर थी। क्योंकि उनकी मैदान में उतरने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अचानक ट्रांसफर पर पाबंदी लगने के बाद उन्हें मायूस होना पड़ा। अब एक बार फिर इन इंस्पेक्टर व दारोगाओं को शासन के आदेश का इंतजार है।

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