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साल 2019 मोदी सरकार के लिए बना सबक और संयम का साल

साल 2019 में कई ऐसी घटनाएं घटी जिसने इसे सबक और संयम का साल बना दिया । इस वर्ष कई बडे़ फैसले व विवाद हुए ।

2019 के बड़े फैसले

अयोध्या मामले का हल
नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सैकड़ों साल पुराने अयोध्या मामले पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने अन्य पक्षों की दलीलों को खारिज करते हुए 2.77 एकड़ की भूमि रामलला विराजमान को सौंप दिया। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि सरकार तीन महीनें में एक ट्रस्ट का निर्माण करे वहीं मस्जिद के लिए अयोध्या में पांच एकड़ भूमि मुस्लिम पक्ष को दे।

अनुच्छेद 370 का खात्मा
पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया। इसके साथ ही अनुच्छेद 35ए का खात्मा भी हो गया। जम्मू कश्मीर में अब भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू हो गया है। इसके साथ ही केंद्र ने जम्मू और कश्मीर को विभाजित करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम से दो नए केंद्रशासित प्रदेशों का निर्माण किया।

तीन तलाक का खात्मा
एक अगस्त 2019 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करते ही तीन तलाक बिल ने कानून का रूप ले लिया। अब भारत में तीन तलाक गैरकानूनी हो गया है। तीन तलाक के दोषी को तीन साल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा पीड़ित महिला गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है। इस विधेयक को लोकसभा ने 25 जुलाई और राज्यसभा ने 30 जुलाई को पारित कर दिया था।

2019 के बड़े विवाद

नागरिकता संशोधन कानून
12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक ने कानून की शक्ल ले ली। इस कानून के अनुसार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक रूप से प्रताड़ित हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी लोगों को आसानी से भारत की नागरिकता मिल सकेगी। इस कानून में मुस्लिमों का नाम नहीं होने से देशभर में लगातार विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। जिसे कई बड़ी पार्टियों का समर्थन भी प्राप्त है। इन प्रदर्शनों में अबतक 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

सीबीआई और ममता बनर्जी
तीन फरवरी 2019 को जब सीबीआई की बड़ी टीम चिटफंड घोटाले की जांच के लिए कोलाकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के पास पहुंची तब उनमें से कुछ अधिकारियों को स्थानीय पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद केंद्र ने सीआरपीएफ को सीबीआई अधिकारियों की सुरक्षा के लिए तैनात कर दिया। जिसके बाद ममता बनर्जी खुद धरने पर बैठ गईं और केंद्र सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई। इसके बाद पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों ने अपने यहां सीबीआई के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।

कर्नाटक का सियासी संकट
25, 28 और 29 जुलाई 2019 को कर्नाटक विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष रमेश कुमार ने कांग्रेस-जेडीएस के 17 बागी विधायकों को अयोग्य करार दे दिया था। गौरतलब है कि कांग्रेस-जेडीएस के 17 विधायकों ने अपनी पार्टी से विद्रोह करते हुए इस्तीफा दे दिया था, इसके बाद कुमारस्वामी सरकार बहुमत साबित करने में असफल रही थी।


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