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नगर निगम भवन कर की मद में पांच फीसद से ज्यादा वृद्धि नहीं करेगा; जाने पूरी खबर

शहर के सवा लाख भवन कर दाता को नगर निगम ने बड़ी राहत दी है। अब नगर निगम भवन कर की मद में पांच फीसद से ज्यादा वृद्धि नहीं करेगा। हर चार साल में निगम इस मद में बीस फीसद की वृद्धि करता था, लेकिन नगर निकाय अधिनियम में संशोधन के बाद अब ऐसा नहीं होगा। केंद्र सरकार की ओर से किए गए इस संशोधन को दून निगम की कार्यकारिणी ने मंजूर कर लिया। बोर्ड बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।मौजूदा समय में शहर का दायरा भले ही साठ वार्ड से बढ़कर सौ वार्ड हो गया है पर नगर निगम अभी भी पुराने साठ वार्डों से ही भवन कर वसूल कर रहा।  राज्य सरकार ने नए बने चालीस वार्डों को अगले दस साल तक भवन कर से मुक्त रखा हुआ है। ऐसे में निगम फिलहाल एक लाख पांच हजार आवासीय जबकि करीब बीस हजार व्यावसायिक भवन से कर की वसूली करता है। कोरोना काल से पहले निगम ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में इस मद में पचास करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया था, मगर मार्च-2019 में कोरोना के कारण भवन कर की वसूली नहीं हो पाई। वर्ष 2020-21 में निगम 39 करोड़ पर रुक गया। नगर निगम ने वर्ष 2014 में स्वकर निर्धारण प्रणाली को लागू किया था। इसके बाद अप्रैल-2018 से भवन कर में बीस फीसद की वृद्धि करते हुए नई दरें लागू की गई। अब निगम अप्रैल 2022 से नई दरें लागू करेगा।

कार्यकारिणी बैठक में उप नगर आयुक्त राजेश नैथानी ने बताया कि केंद्र सरकार ने भवन कर की नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत अधिकतम 0.1 फीसद से पांच फीसद तक वृद्धि की जा सकती है, जबकि निगम बीस फीसद की वृद्धि हर चार साल में करता है। महापौर सुनील उनियाल गामा ने आदेश दिए कि इस साल निगम प्रशासन भवन कर में बढ़ोत्तरी का जो प्रस्ताव तैयार करेगा, उसमें अधिकतम वृद्धि पांच फीसद रखी जाए। उन्होंने कर अनुभाग को इसके बाद होने वाली अनुमानित हानि और लाभ का आंकलन करने के आदेश भी दिए।नगर निगम ने दून शहर की 129 मलिन बस्तियों से भवन कर वसूली का आदेश भी दे दिया है। सरकार ने अगले तीन साल तक बस्तियों को तोडऩे पर रोक लगा दी है। ऐसे में नगर निगम कार्यकारिणी ने अगले महीने से कर वसूली की मंजूरी दी है। इस दौरान मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. कैलाश जोशी ने प्रस्ताव रखा कि मलिन बस्तियों से भवन कर के साथ सालाना कूड़ा उठान का एकमुश्त शुल्क भी जमा किया जाए। दूसरा यह कि भवन कर उसी से लिया जाए, जो कूड़ा उठान का मासिक शुल्क देता हो। इसे कार्यकारिणी ने मंजूर कर लिया।

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