विष्णुप्रयाग परियोजना का पर्यावरणीय अध्ययन करने का फैसला

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श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय गोपेश्वर और विष्णुगाड पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना कार्यदायी संस्था (टीएचडीसीआईएल) के मध्य परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन ईआईए हेतु करार किया गया। 4.111 मेगावाट क्षमता की विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन है। पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार के मानकानुसार जल विद्युत परियोजना के बनने से स्थानीय पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को गहन अध्ययन किया जाना अनिवार्य है।

इस अध्ययन का उद्देश्य स्थानीय जनसमुदाय के जीवन स्तर और पर्यावरणीय दशाओं को प्रभावित किये बिना, जल विद्युत परियोजना का निर्माण तथा संचालन किया जाना होता है। पर्यावरण प्रभाव आंकलन एनवायरमेंट इंपेक्ट एसाईमेंट के अंतर्गत परियोजना क्षेत्र की वायु, जल, मृदा और जैविक घटकों वनस्पति तथा जन्तुओं पर परियोजना के निर्माण से पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।

जिससे पर्यावरण को प्रभावित किये बिना परियोजना कार्य पूर्ण किया जा सके। विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन के लिए राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर के प्राचार्य प्रो़ आरके गुप्ता व टीएचडीसी आईएल के अपर महाप्रबंधक ने हस्ताक्षर किये।

प्राचार्य प्रो़ आरके गुप्ता ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली के कारण विद्युत की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। जिसकी पूर्ति जल विद्युत परियोजनाओं के मानकानुसार निर्माण संचालन से ही की जा सकती है। किन्तु आवश्यकताओं व पर्यावरण के मध्य संतुलन बनाये रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस अवसर पर पर्यावरण प्रभाव आंकलन के संयोजक डा़ मनीष वेलवाल टीएचडीसीआईएल के प्रबंधक पर्यावरण मनोज रांगड आदि मौजूद थे।