लाॅकडाउन लागू करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य था : मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अमर उजाला द्वारा आयोजित वेबिनार के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों और प्रबुद्धजनों के साथ संवाद किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कोविड-19 के संदर्भ में राज्य में किए गए कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 25 जनवरी को हमें पहली बार सूचना मिली कि नेपाल में कोरोना का केस आया है। हमने केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय को सूचित किया। भारत-नेपाल सीमा पर चैकसी बरती जाने लगी। वहां से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की स्क्रिनिंग की गई। 12 मार्च को शिक्षण संस्थानों को बंद करने के निर्देश् दिएा। 15 मार्च को उत्तराखण्ड में पहला केस बाहर से आया। 15 मार्च को होटल, रेस्टोरेंट आदि के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए। 18 मार्च को सरकारी कार्यालयों को कोविड-19 के संबंध में वर्क फ्राॅम होम का निर्देश जारी किया।

इसी प्रकार का आदेश निजी कार्यालयों/व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक संस्थानों के लिए भी जारी किया गया। 22 मार्च को जनता कफ्र्यू के दिन से ही प्रदेश में लगातार लाॅकडाउन रखा गया। इस प्रकार लाॅकडाउन लागू करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य था। हमने अपनी पूरे सिस्टम को कोविड से लड़ाई में लगाया। इसमें स्वयं सेवी संस्थाओं और आम जनता का भी पूरा सहयोग मिला। इसका परिणाम भी मिला। लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि प्रवासियों ने उत्तराखण्ड में आने की बात कही। हमने निर्णय लिया कि संकट के समय अपने लोगों को ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता है। हम रेल, बस आदि माध्यमों से लगभग 3 लाख 27 हजार प्रवासी भाईयों को वापस लाए। इनको लाने में सारे हेल्थ प्रोटोकाल का पालन किया गया।