उत्तराखंड

रिश्वत मामले में एसडीएम के पेशकार को छह साल बाद सात साल की सजा

साल 2013 में बीस हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए काशीपुर के तत्कालीन एसडीएम के पेशकार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त ने सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

प्रेम सिंह निवासी ग्राम दभौरा काशीपुर ऊधमसिंह नगर ने 10 मई 2013 को विजिलेंस हल्द्वानी को शिकायती पत्र देकर बताया था कि उसने और उसकी पत्नी वीरवती ने अपनी खेती की जमीन को आपस में एक दूसरे के नाम पर बदलने के लिए एसडीएम कोर्ट में आवेदन किया था।

लेकिन, एसडीएम काशीपुर से फाइल पर आदेश कराने के नाम पर उनके पेशकार दयासागर आर्या ने उनसे बीस हजार रुपये की रिश्वत मांगी। प्रथमदृष्टया आरोप सही पाए जाने पर निरीक्षक केवलानंद आर्या के नेतृत्व में गठित टीम ने दयासागर आर्या को 13 मई 2013 को शिकायतकर्ता प्रेम सिंह से बीस हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी

मामले में अभियोग दर्ज करने और विवेचना के बाद अभियुक्त के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण नरेंद्र दत्त ने मामले में दोषी पाए गए पेशकार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत तीन साल का कठोर कारावास और दस हजार के जुर्माने की सजा सुनाई।

जुर्माना नहीं भरने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। धारा 13 (1) डी, 13(2) के तहत अभियुक्त को सात साल के कठोर कारावास व पचास हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं भरने पर अभियुक्त को एक वर्ष के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।

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