उत्तराखंड

बैरोजगार युवाओं के लिए एक नई आस बनकर आई आँचल, पलायन रोकने के लिए करेगी ये काम

अपनी इच्छाशक्ति से क्या कुछ हालिस नहीं किया जा सकता है। ऐसी ही कामयाबियों का परचम फहरा रही हैं उत्तराखंड की एक बेटी इनका नाम है आंचल रावत। आंचल उतरकाशी जिले के पुरोला विकासखंड में मखना गाँव की रहनी वाली हैं। गांव में ही मशरूम की खेती कर आजिविका चलाती हैं, मशरूम को आर्थिकी का जरिया बनाकर उन्होंने बैरोजगार युवाओं के लिए एक नई आस जगाई है।

एसजीआरआर कालेज देहरादून से बीएससी हार्टिकल्चर में मशरूम की खेती के विषय में पढ़ाई की। शिक्षक ने भी उनकी इसमें मदद की और खासकर आंचल के पिता राजेंद्र रावत ने। आंचल का मानना है कि अगर उन्हें आर्थिक मदद मिले तो वो बड़े पैमाने पर मशरूम की खेती करने के इच्छुक युवाओं को प्रशिक्षण दे सकती हैं।

मशरूम की खेती करने की जानकारी साझा करते हुए आंचल ने बताया कि मशरूम को उगाने के लिए 20 से 25 डिग्री तापमान की जरूरत होती है तथा फसल 25 से 30 दिन में तैयार हो जाती है। यहां मौसम को देखते हुए जुलाई अगस्त के महीने में मशरूम उगाये थे। जिसकी गाँव में काफी मांग होने लगी।

उसका कहना है कि कम लागत और समय में मशरूम की खेती आजीविका का जरिया बन सकती है। जिससे आर्थिक स्थिति तो मजबूत होगी ही गाँव से पलायन भी रूकेगा। जरूरत है सरकार युवाओं को उचित आर्थिक मदद और प्रोत्साहन दे।

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