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डिजिटल इंडिया का असर, कांकेर के 100 से ज्यादा स्कूलों में वीडियो के जरिये बदल रही है तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया ने छत्तीगसढ़ के घनघोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के स्कूलों की तस्वीर बदल दी है। कांकेर जिले के अंदरूनी स्कूलों में जहां नक्सलियों के भय से शिक्षक जाने से डरते हैं, अब वहां वीडियो लेक्चर ने छात्रों की तकदीर को बदलने का काम शुरू कर दिया है।

कुछ साल पहले तक पिछड़े इलाकों में गिने जाने वाले कई हाई स्कूलों के बच्चों ने न सिर्फ बेहतर अंक पाए, बल्कि टॉप टेन में जगह भी बनाई। कांकेर के 100 से ज्यादा स्कूलों में वीडियो लेक्चर से बच्चों के भविष्य को खूबसूरती से संवारने का काम किया जा रहा है।

प्रोजेक्ट प्रज्ञा के तहत 10वीं से 12 वीं कक्षा तक के बच्चों के विज्ञान-गणित के 15 सौ वीडियो तैयार हो चुके हैं। खास बात यह है कि ये वीडियो यूट्यूब पर भी अपलोड किए गए हैं, जिससे बच्चे अपने घर में भी आसानी से पढ़ाई कर सकते हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में कांकेर के गिरहौला स्कूल के तीन बच्चों ने टॉप टेन में जगह बनाई। वीडियो में रोचक अंदाज में विषयों के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसमें बोर्ड पर मैप बनाकर, चार्ट तैयार करके और नए उदाहरणों के साथ पढ़ाई कराई जा रही है, जिससे बच्चों में उत्साह बना रहता है।

ब्लैक बोर्ड के परदे पर चमकती लाइट पर दिख रहे वीडियो के सहारे छात्र जिंदगी को चमकाने का ख्वाब देख रहे हैं। मुश्किल विषयों को आसान बनाने के लिये वीडियो तैयार किया गया है। कक्षा में अध्यापक भी होते हैं, लेकिन वे चुप होकर सिर्फ बच्चों पर नजर रखते हैं और लेक्चर खत्म होने के बाद बच्चों के सवालों का जवाब देते हैं। जिन बच्चों की विषय पर बुनियादी पकड़ नहीं होती है, उनके लिए छठवीं से लेकर 10वीं तक के सिलेबस को रिकॉर्ड करवाया गया है। इससे बच्चों का बेस काफी मजबूत हो रहा है।

वीडियो के बाद आया बदलाव
कांकेर के टिकेश कुमार देवांगन ने 96.67 प्रतिशत हासिल कर प्रदेश में सातवां स्थान हासिल किया। उदित कुमार देवांगन ने 96.17 प्रतिशत के साथ 10वां और राहुल कुमार साहू ने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए। 2017 की परीक्षा में 12वीं कक्षा का रिजल्ट 85 प्रतिशत हो गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का सही उपयोग कैसे किया जाए, ये इन स्कूलों से सीखा जा सकता है। जिन बच्चों को अच्छी पढ़ाई नसीब नहीं होती थी, वे भी आज अच्छे और सुनहरे भविष्य के सपने देख रहे हैं। इसके लिए वे अधिकारी भी काबिल—ए—तारीफ हैं, जिन्होंने इस बदलाव की जिम्मेदारी उठाई। – केदार कश्यप, स्कूल शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़

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