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डाटा सुरक्षा बिल से गलत काम करने वाली कंपनियां डरेंगी : जस्टिस श्रीकृष्ण

प्रस्तावित डाटा सुरक्षा विधेयक में उल्लंघनों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाने के प्रावधान से जानबूझकर गड़बड़ी करने वाली कंपनियां डरेंगी। इस बिल के माध्यम से उन कंपनियों पर भी लगाम लगेगी, जो जेल की सजा नहीं होने पर जुर्माना भरकर फिर उसी तरह के काम में लग जाती हैं। यह कहना है डाटा सुरक्षा पर बनाई गई कमेटी की अध्यक्षता करने वाले जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण का। कमेटी ने 27 जुलाई को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

जस्टिस श्रीकृष्ण ने कहा, ‘हर आधुनिक कानून में आपराधिक दंड का प्रावधान होता है। यह उन लोगों में भय पैदा करता है जो जानबूझकर या बहुत लापरवाही में गलत काम करते हैं।’ आपराधिक दंड के बजाय दीवानी देनदारी का प्रावधान रखने से इस कानून का असर ही खत्म हो जाएगा। ऐसे में बड़ी कंपनियां या कारपोरेट घराने केवल जुर्माना भरकर बड़े से बड़ा उल्लंघन कर आसानी से निकल जाएंगे।

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत डाटा की निजता को मूल अधिकार माना गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी पुट्टास्वामी मामले में यह व्यवस्था दी है कि मूल अधिकारों के उल्लंघन के मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

कड़े कानून पर कंपनियों को एतराज

उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियों ने प्रस्तावित विधेयक में अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाए जाने पर एतराज जताया है और तर्क दिया कि इससे कारोबार करना कठिन हो जाएगा, क्योंकि इससे कंपनियों और उसके कर्मचारियों को आपराधिक तंत्र से जूझना पड़ेगा और वे कारोबार पर ध्यान नहीं दे पाएंगे। ‘ग्राहक की सूचना के एकतरफा प्रयोग के अधिकार’ पर जस्टिस श्रीकृष्ण ने कहा कि इसका इस्तेमाल संबंधित व्यक्ति की सहमति के बाद ही कर सकते हैं।

क्या हैं प्रावधान

 प्रस्तावित विधेयक में यूरोपीय डाटा निजता कानून जैसे प्रावधान ही किए गए हैं। प्रस्तावित कानून में भारतीयों के निजी डाटा का स्टोरेज भारत में करने का ही प्रावधान तो नहीं है, लेकिन यह सरकार को निजी डाटा को ‘संवेदनशील डाटा’ की तरह श्रेणीबद्ध करने की भी छूट देता है जिसे हर हाल में भारत में ही रखना पड़ सकता है।

 

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