उत्तराखंड

उत्तराखंड विधि आयोग ने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए जाने की सिफारिश की

देश में गोमाता पर जारी राजनीति के बीच उत्तराखंड विधि आयोग ने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए जाने की सिफारिश की है. राज्य विधि आयोग ने सरकार को भेजी अपनी 5वीं रिपोर्ट में गोवंश संरक्षण अधिनियम में संशोधन करने की सिफारिश करते हुए कहा है कि न्याय और राष्ट्रहित में गाय को राष्ट्रमाता घोषित किया जाना चाहिए. इससे पहले उत्तराखंड विधानसभा भी गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर चुकी है.

बता दें कि गोवंश के संरक्षण के लिए कई राज्यों की सरकारे अलग अलग तरह की योजनाएं बना रही हैं. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अस्थाई गौशाला बनाने के लिए ‘गो सेवा सेस’ लगाने का फैसला लिया है. तो वहीं मध्य प्रदेश की नवनिर्वाचित सरकार हर गांव में गौशाला बनाने का फैसला लिया है. इस मामले में सबसे पहली पहल राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने देश का सबसे पहला गौ पालन मंत्रालय बना के किया था.

सितंबर, 2018 में उत्तराखंड विधानसभा ने गोय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था. पशुपालन राज्यमंत्री रेखा आर्या ने कहा था कि विधानसभा से सर्वसम्मति से पारित इस प्रस्ताव पर सदन का आग्रह है कि केंद्र गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मंजूरी दे. वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा था कि गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने के साथ-साथ गाय के संरक्षण का भी प्रयास होना चाहिए.

 गौरतलब है कि गौ सेवा से जुड़े विभिन्न संगठनों ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में भारतीय गौ क्रांति की अगुवाई में संविधान में संशोधन कर गाय को पशु की श्रेणी से अलग कर राष्ट्रमाता का दर्जा की मांग कर चुके हैं.

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