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उत्तराखंड में घर वापसी के लिए 87 हजार लोगों ने किया पंजीकरण, ग्राम प्रधानों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

उत्तराखंड से बाहर दूसरे राज्यों में फंसे 87 हजार लोग घर वापसी के लिए पंजीकरण करवा चुके हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फंसे लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। प्रदेश सरकार शनिवार से अन्य राज्यों के साथ फंसे लोगों की सूची साझा करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी। सीएम आवास पर शुक्रवार शाम हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित राज्यों से समन्वय बनाते हुए सुनियोजित तरीके से सारी व्यवस्था की जाए।

नोडल अधिकारी और सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि अधिकांश पंजीकृत लोग पर्वतीय जिलों के हैं। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, राधिका झा भी उपस्थित थे।

ग्राम प्रधानों की बढ़ेगी जिम्मेदारी
प्रदेश सरकार के पास पंजीकृत अधिकांश लोग पर्वतीय जनपदों के हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे में ग्राम प्रधानों को अधिकार दिया जाएगा। वापस लौटने वाले लोगों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी में प्रधान अहम रहेंगे और जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर होम क्वारंटीन या अन्य व्यवस्था को संचालित करवाएंगे।
दिल्ली से आएंगे 26 हजार से अधिक लोग…
 
सर्वाधिक दिल्ली से 26 हजार लोगों का पंजीकरण हो चुका है। सरकार के पास पहले से 35 हजार का डाटा था, लेकिन दो दिनों में ऑनलाइन और कॉल सेंटरों के माध्यम से हजारों लोगों ने पंजीकरण करवाया है। यह आंकड़ा आने वाले दिनों में और बढ़ेगा। दक्षिण भारत से भी कई लोगों ने पंजीकरण करवाया है।

शनिवार को जारी होगी एसओपी, अंतरजनपदीय आवाजाही भी शुरू
प्रदेश सरकार ने फंसे लोगों की वापसी सुनिश्चित करने के परिवहन निगम को निर्देश दे दिए हैं। राज्य के भीतर एक जिले से दूसरे जिले में जाने वाले लोगों को लाने ले जाने की प्रक्रिया रविवार से शुरू होगी। इसके अलावा अन्य राज्यों से लाए जाने वाले लोगों के लिए प्रदेश सरकार शनिवार को एसओपी बना लेगी। इस एसओपी में प्रक्रिया तय की जाएगी कि किस तरह
स्वास्थ्य जांच से लेकर होम या संस्थागत क्वांरटीन की व्यवस्था बनाई जाएगी। इसे दूसरे राज्यों के साथ साझा किया जाएगा, जिसके बाद बसों और ट्रेनों से वापसी करवाई जाएगी।

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