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अस्पताल स्टाफ की अमानवीयता के चलते गर्भवती महिला ने खुले में दिया बेटी को जन्म

  रौन अस्पताल के स्टाफ ने मंगलवार रात अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी। मिहोना अस्पताल से रैफर होकर आई प्रसूता को स्टाफ ने भर्ती नहीं किया। जबकि पति बार-बार मिन्नतें करता रहा कि पत्नी को वार्ड में भर्ती कर लें। सुबह करीब 5.40 बजे महिला ने अस्पताल के बाहर खुले में बेटी को जन्म दिया। तब भी 1 घंटे तक स्टाफ बाहर निकलकर नहीं आया। सुबह परिसर में भी़ड़ जमा होने के बाद लोगों ने हंगामा किया तब स्टाफ ने महिला और नवजात को भर्ती किया।

इमलाह गांव निवासी अर्चना कुशवाह (32) को रात करीब 11.30 बजे प्रसव दर्द शुरू हो गए। पति ने 108 एंबुलेंस को कॉल किया। 15 मिनट बाद एंबुलेंस गांव में पहुंची और प्रसूता को मिहोना अस्पताल में भर्ती कराया। स्टाफ ने जांच की और हीमोग्लोबिन 5 परसेंट निकला। रात 2.30 बजे अर्चना को मिहोना से रौन सामुदायिक केंद्र रैफर कर दिया। मिहोना से सास शिवकली, जेठानी सुमन, जेठ अजयसिंह और पति केशव सिंह कुशवाह रात 3 बजे महिला को रौन अस्पताल लेकर आए।

वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्स रजनी बघेल ने महिला के पर्चे देखकर भर्ती करने से मना कर दिया। पति केशव सिंह का कहना है उसने नर्स से कई बार मिन्नतें कर कहा कि पत्नी को तेज दर्द हो रहे हैं, इसलिए भर्ती कर लें, लेकिन नर्स ने कह दिया यहां डिलेवरी नहीं हो पाएगी। नर्स से यहां तक कहा कि रात भर के लिए ही भर्ती कर लें, सुबह जिला अस्पताल ले जाएंगे, लेकिन नर्स ने दुत्कार कर भगा दिया।

‘रात में महिला मिहोना से रेफर होकर आई थी, तो स्टाफ को तत्काल उसे भर्ती करना चाहिए था। मुझे भी रात में जानकारी नहीं दी। हमने स्टाफ से जवाब मांगा है।’  -डॉ. विजय कुमार उटगेरकर, मेडिकल ऑफिसर,  रौन अस्पताल परिसर में खुले में प्रसव होना गंभीर मामला है। महिला को अस्पताल में भर्ती नहीं करने वाले स्टाफ पर हम कार्रवाई करेंगे। इस संबंध में जानकारी करते हैं।’ – आशीष कुमार गुप्ता, कलेक्टर,

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